
जांजगीर-चांपा।
सन 2008 शिक्षा जगत के लिए एक काले अध्याय के रूप में सामने आया था, जब प्रदेश की टॉपर रही पोरा बाई का नाम नकल प्रकरण में उजागर हुआ। पोरा बाई ने जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा स्थित शासकीय हाई स्कूल से कक्षा 12वीं की परीक्षा दी थी, जिसमें उसे 500 में से 484 अंक प्राप्त हुए थे और वह प्रदेश में टॉपर बनी थी।
परिणाम घोषित होने के बाद जब उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई, तो पोरा बाई की हैंडराइटिंग उसके पूर्व लिखित अभिलेखों से मेल नहीं खाई। संदेह गहराने पर मामले की जांच हुई और यह बड़ा नकल प्रकरण सामने आया।
मामले के उजागर होने पर तत्कालीन केंद्राध्यक्ष एस.एल. जाटव सहित अन्य शिक्षकों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। यह मामला लगभग 12 वर्षों तक न्यायालय में विचाराधीन रहा। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, चांपा द्वारा साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया था।
इसके बाद राज्य शासन की ओर से द्वितीय सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई। द्वितीय सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए पोरा बाई सहित चार आरोपियों को दोषी ठहराया और प्रत्येक को 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
इस फैसले को शिक्षा जगत में नकल के विरुद्ध एक कड़ा संदेश माना जा रहा है




