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July 5, 2026 9:53 pm

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जांजगीर-चांपा, 5 जुलाई। जांजगीर-चांपा पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना चांपा क्षेत्र से करीब 21.1 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत 10 लाख 55 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस ने गांजा बिक्री में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन में थाना चांपा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि हनुमान चौक, देवांगन पारा में एक युवक गांजा बेच रहा है। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और वीरेन्द्र देवांगन (28 वर्ष) निवासी हनुमान चौक, देवांगन पारा, चांपा को हिरासत में लिया। आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली, जहां से चार पैकेट और दो प्लास्टिक बोरियों में रखा 21.1 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। इसके साथ ही गांजा बिक्री से प्राप्त 10,450 रुपये नकद भी जब्त किए गए। थाना चांपा में आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 357/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अशोक वैष्णव के नेतृत्व में उप निरीक्षक सत्यम चौहान, प्रशिक्षु उप निरीक्षक गोपी सिंह, रूकसाना बानो, निकिता साहू, सहायक उप निरीक्षक भुवनेश्वर राठौर तथा थाना चांपा के अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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प्रदेश की टॉपर से दोषी तक: 17 साल बाद नकल कांड में पोरा बाई समेत चार को सश्रम कारावास

जांजगीर-चांपा।

सन 2008 शिक्षा जगत के लिए एक काले अध्याय के रूप में सामने आया था, जब प्रदेश की टॉपर रही पोरा बाई का नाम नकल प्रकरण में उजागर हुआ। पोरा बाई ने जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा स्थित शासकीय हाई स्कूल से कक्षा 12वीं की परीक्षा दी थी, जिसमें उसे 500 में से 484 अंक प्राप्त हुए थे और वह प्रदेश में टॉपर बनी थी।

परिणाम घोषित होने के बाद जब उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई, तो पोरा बाई की हैंडराइटिंग उसके पूर्व लिखित अभिलेखों से मेल नहीं खाई। संदेह गहराने पर मामले की जांच हुई और यह बड़ा नकल प्रकरण सामने आया।

मामले के उजागर होने पर तत्कालीन केंद्राध्यक्ष एस.एल. जाटव सहित अन्य शिक्षकों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। यह मामला लगभग 12 वर्षों तक न्यायालय में विचाराधीन रहा। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, चांपा द्वारा साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया था।

इसके बाद राज्य शासन की ओर से द्वितीय सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई। द्वितीय सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए पोरा बाई सहित चार आरोपियों को दोषी ठहराया और प्रत्येक को 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

इस फैसले को शिक्षा जगत में नकल के विरुद्ध एक कड़ा संदेश माना जा रहा है

Hasdev Express
Author: Hasdev Express

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