जांजगीर-चांपा पुलिस में पदस्थ आरक्षक ने ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवता का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो पूरे विभाग के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। थाना सारागांव में पदस्थ आरक्षक चन्द्रहास लहरे ने ड्यूटी पर जाते समय मिले गुम हुए थैले को उसके वास्तविक मालिक तक सुरक्षित पहुंचाकर पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 27.12.25 को सुबह लगभग 11 बजे आरक्षक चन्द्रहास लहरे जब ड्यूटी के लिए थाना सारागांव जा रहे थे, तभी सारागांव बस स्टैंड से करीब 100 मीटर दूर सड़क किनारे उन्हें एक लावारिस थैला पड़ा मिला। थैले की जांच करने पर उसमें नगदी राशि व आभूषण पाए गए। आसपास किसी दावेदार के न मिलने पर उन्होंने तत्काल थाना प्रभारी सारागांव निरीक्षक सुभाष चौबे को इसकी सूचना दी और थैला थाना लाकर महिला प्रधान आरक्षक लेखक सरस्वती जांगड़े को सुपुर्द किया।
थैले की विधिवत जांच में उसमें ₹68,000 नगद, पुराने चांदी के जेवरात, आधार कार्ड एवं ग्रामीण बैंक की पासबुक पाई गई। दस्तावेजों के आधार पर ग्राम सरवानी के सरपंच को सूचित किया गया, जिनके सहयोग से थैले की वास्तविक मालकिन नागेश्वरी धीवर (उम्र 51 वर्ष), निवासी ग्राम सरवानी, थाना सारागांव की पहचान हुई।
पीड़िता ने बताया कि उक्त थैला चांपा में सुनार की दुकान पर सोना-चांदी बदलने जाते समय गुम हो गया था। थाना बुलाकर पूछताछ एवं थैले में रखी सामग्री की पुष्टि के पश्चात पूरी नगदी, जेवरात व दस्तावेज सुरक्षित रूप से पीड़िता को सौंप दिए गए।
आरक्षक चन्द्रहास लहरे के इस सराहनीय कार्य से न केवल पुलिस विभाग की ईमानदार छवि सामने आई है, बल्कि आम जनता का पुलिस पर विश्वास भी और मजबूत हुआ है। पीड़िता ने जांजगीर-चांपा पुलिस के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की सच्ची मिसाल बताया।




