जांजगीर चाम्पा–Reforms-Based and Results-Linked, Distribution Sector Scheme (RDSS) के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में चल रहे कार्यों में गड़बड़ियों और पारदर्शिता के अभाव को लेकर उठे सवाल अब गंभीर मोड़ ले चुके हैं। जिला पंचायत सदस्य श्रीमती उमा राजेंद्र राठौर (क्षेत्र क्रमांक 14) की लिखित शिकायत के बाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) के RDSS प्रोजेक्ट से जुड़े कार्यपालन अभियंता को निलंबित कर दिया गया है।
अपूर्ण और भ्रामक जानकारी से उठा शक
श्रीमती राठौर ने RDSS योजना के तहत जिले में स्वीकृत कार्य योजना, ठेकेदारों की नियुक्ति, खर्च की स्थिति एवं कार्य प्रगति से संबंधित जानकारी मांगी थी, किन्तु विभाग द्वारा जो विवरण प्रस्तुत किया गया वह न केवल अपूर्ण और भ्रामक था, बल्कि उससे विभागीय कार्यप्रणाली पर संदेह की स्थिति उत्पन्न हो गई।
“सूचना का जो प्रारूप मुझे प्राप्त हुआ, वह पारदर्शिता से कोसों दूर है। इससे यह आभास होता है कि योजनाओं में गंभीर गड़बड़ी छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि समय रहते वास्तविकता सामने नहीं लाई गई तो यह एक बड़ा जनविरोधी भ्रष्टाचार सिद्ध हो सकता है,” — श्रीमती उमा राजेन्द्र राठौर, सदस्य, जिला पंचायत।
कार्रवाई का असर: प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारी
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने RDSS प्रोजेक्ट के प्रभारी कार्यपालन अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिकायत में दम था और अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में है।
हालांकि योजना के अंतर्गत कार्य अभी जारी हैं, परंतु अब उनकी निगरानी एवं मूल्यांकन प्रशासनिक स्तर पर और अधिक गंभीरता से किया जाएगा।
विभागीय चुप्पी और जनता की चिंता
इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक विभाग की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं आमजन और सामाजिक कार्यकर्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि कोई गड़बड़ी नहीं थी तो प्रोजेक्ट प्रभारी को निलंबित क्यों किया गया? यह स्थिति विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है!
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जल्द ही योजना के तहत किए गए कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कराए जाने की संभावना है। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो कई और अधिकारी भी निलंबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
उमा राठौर की शिकायत के बाद CSEB RDSS प्रोजेक्ट के कार्यपालन अभियंता निलंबित
अपूर्ण और भ्रमपूर्ण जानकारी से उत्पन्न हुआ भ्रष्टाचार का संदेह
जांच और ऑडिट की संभावना प्रबल




