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July 5, 2026 4:04 pm

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शांत हो गई लोक कला संस्कृति की बुलंद आवाज पंचतत्व के साथ सांस्कृतिकतत्व में विलीन हो गई तीजन बाई- गिरधारी यादव।

छत्तीसगढ़ माटी की सोंधी खुशबू को पंडवानी गायन के माध्यम से विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने वाली लोक कला लोक गाथा लोक संस्कृति की सशक्त पर्याय पद्मश्री तीजन बाई का देहावसान छत्तीसगढ़ी बोली भाखा लोक कला के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है इस खालीपन को भरा नहीं जा सकता।
उक्त उदगार पद्म श्री तीजन बाई के निधन पर अपनी श्रद्धा सुमन श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव फिल्म राइटर गिरधारी यादव ने व्यक्त किया हैl श्री यादव ने अपने शोक संदेश में कहा है बालपन से पंडवानी विद्या के माध्यम से अपने प्रतिभा को विश्व विख्यात बनाने वाली तीजन बाई का निधन उच्च स्तर की भारतीय प्रतिभा का हमारे बीच नहीं होना कि कमी को पूरी नहीं की सकती उनकी प्रतिभा की छाया सदैव लाेकगाथा के लिए पथ प्रदर्शन करता रहेगा 8 अगस्त 1956 से लेकर 5 जुलाई 2026 तक की उनके जीवन यात्रा अनेकों कठिनाइयों बाधाओं मेहनत से भरा रहा संगीत नाटक अकादमी छत्तीसगढ़ रत्न कबीर सम्मान पद्म भूषण पद्म विभूषण पद्मश्री जैसे उच्च पुरस्कार से सम्मानित तीजन बाई माता सरस्वती की सच्ची पुत्री थी उनकी बुलंद आवाज में लोककला लोक गाथा का सच्चा पर्याय छुपा हुआ था ऐसी प्रतिभाओं का जन्म सदियों में एक बार होता है तीजन बाई की स्मृति सदैव छत्तीसगढ़ की लोक कला लोक गाथा लोक संस्कृति में विराजमान रहेगी वह पंचतत्व में विलीन होने के साथ लोककला लोक गाथा लोकसंस्कृति में भी विलीन हो गई वे सदैव अमर रहेंगी।

Hasdev Express
Author: Hasdev Express

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