चौक-चौराहों पर एकत्रित होकर सुनी कमरछठ की कथा, पसहर चावल से बनाया प्रसाद
कोसमंदा (चांपा)। पुत्र की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना को लेकर कमरछठ पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने दिनभर निर्जला उपवास रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और कमरछठ की कथा सुनी।
पर्व को लेकर सुबह से ही महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं अपने-अपने मोहल्लों के चौक-चौराहों पर एकत्रित हुईं, जहां पूजा-अर्चना के बाद आचार्यों द्वारा कमरछठ व्रत की कथा सुनाई गई। महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण कर अपने पुत्रों की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना की।
कमरछठ की परंपरा के अनुसार व्रत के दौरान बिना हल चले उगाए गए पसहर चावल का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाओं ने पूजा के बाद पसहर चावल से प्रसाद तैयार किया। धार्मिक मान्यता और परंपरा के अनुसार प्रसाद अर्पित करने के बाद महिलाओं ने अपने पुत्रों को पोता लगाकर उनके सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
इस दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना रहा। महिलाओं ने सामूहिक रूप से व्रत एवं पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली और संतान की मंगलकामना की। कमरछठ पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक आस्था और संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।




