
जांजगीर-चांपा। तस्वीर में नजर आ रहा यह घर ना ही पाकिस्तान में स्थित है और ना ही इस घर में विदेशी घुसपैठिए रहते हैं, यह घर कोई आजकल का बना भी नहीं है, और ना ही दूरस्थ अंचलों में ऐसी जगह बना है जहां तक पंहुचना नामुमकिन हो, छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिला मुख्यालय में वार्ड नं. 08 में नहरिया बाबा मुख्य मार्ग में नहर किनारे यह घर स्थित है जिसमें जिले के वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह क्षत्री अपने परिवार के साथ निवास करते हैं। इस घर में अब तक कोई बीएलओ नहीं पंहुचा जबकि एसआईआर प्रारंभ होने से पहले कलेक्टोरेट में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कलेक्टर ने कहा था कि एसआईआर के एक माह में बंद घरों में भी तीन बार बीएलओ पंहुचेंगे। यह स्थिति तब है जब पूरा मामला पहले ही कलेक्टर के संज्ञान में लाया जा चुका है।
उक्त प्रेस कांफ्रेंस में कलेक्टर की ओर से जानकारी दी गई की एसआईआर 2003 के मतदाता सूची को आधार मानकर की जा रही है। प्रेस कांफ्रेंस में ही जब उनसे पूछा गया कि 2003 में कोई मतदाता किसी अन्य वार्ड का निवासी हो और अभी किसी अन्य वार्ड का, अथवा मतदाता सूची में मतदाता का नाम किसी अन्य वार्ड में हो और वर्तमान मे निवास किसी अन्य वार्ड में हो, तब क्या होगा, इस पर कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने बताया था कि ऐसी स्थिति में मतदाता शिफ्टेड में आएगा और वर्तमान में मतदाता जिस पते पर रहता है वहां जब बीएलओ पंहुचेंगे तो उसे फार्म 6 और फार्म 7 भरना होगा, इससे अच्छा वह फार्म 8 भर ले जिससे कि जैसे ही उसका नाम इस वार्ड में दर्ज होगा, पुराने वार्ड अथवा पुराने स्थान की मतदाता सूची से उसका नाम आटोमेटिक डिलिट हो जाएगा।
अंतिम चुनाव तक वोट दिया, फिर कब कटा नाम ?
वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह क्षत्री द्वारा जब 19 नवंबर को कलेक्टर जन्मेजय महोबे को मैसेज के माध्यम से जानकारी दी गई कि वह पिछले 15 वर्षो से (वर्तमान में भी) अपने परिवार के साथ जिस घर में रह रहे हैं वह जांजगीर में नहरिया बाबा मुख्य मार्ग में नहर किनारे, वार्ड नंबर 8 में शिव मंदिर के पास मौजूद है जहां आज तक कोई बीएलओ नहीं पंहुचा है जिसकी वजह से उनका नाम अभी भी वार्ड नं. 16 के मतदाता सूची में मौजूद है। उनका संयुक्त परिवार वाला घर है, जिसमें हमेशा कोई ना कोई मौजूद रहते हैं, लेकिन एसआईआर के 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक बीएलओ नहीं पंहुचा, उसके थोड़ी देर बाद ही तहसील कार्यालय जांजगीर से उज्जवल तिवारी का फोन आया जिसने उनके वार्ड नंबर 16 स्थित पुराने मकान की जानकारी ली कि वो वार्ड नंबर 16 में पहले कहां पर रहते थे, जब उन्हें बताया गया कि उनके घर के पास में ही रहते थे। तब उनका कहना था कि बीएलओ का कहना है कि उनका नाम तो वार्ड नंबर 16 के मतदाता सूची से कट गया है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह क्षत्री द्वारा उन्हें बताया गया कि इतने सालों तक तो उनका नाम वार्ड नंबर 16 की मतदाता सूची में था और अब तक हुए सभी चुनावों में वो अपने मताधिकार का प्रयोग करते आए हैं। 2023 में हुए विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपना वोट डाला है, उसके बाद सबसे अंत में हुए नगरीय निकाय चुनाव में भी उन्होंने अपने मताधिकार का उपयोग किया है, उसके बाद तो कोई चुनाव नहीं हुआ है, अब कलेक्टर को मैसेज करने के बाद उनका नाम बीएलओ ने काट दिया हो वह अलग बात है। इस पर उज्जवल तिवारी ने उनसे इपिक नंबर मांगा, इपिक नंबर लेनेे के बाद उनकी ओर से फिर संपर्क नहीं किया गया।
जब एक-दो साल पहले आने वाले अधिकारी जिले के मतदाता तो मैं क्यों नहीं …. ?




