कोसमन्दा(चाम्पा)–राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 एवं छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 के अंतर्गत अंत्योदय परिवारों को 35 kg प्रतिमाह एवम प्राथमिकता परिवारों को 5 kg प्रति सदस्य चावल का वितरित किया जाता है।
परन्तु ग्राम कोसमन्दा(चाम्पा) के हितग्राहीयो को अपनी हक की अनाज को पाने के लिये नाको चने चबाने पड़ रहे है प्रत्येक माह दर्जनों गरीब परिवार अनाज पाने से वंचित हो जा रहे है। हितग्राहियों का कहना है कि दुकान संचालक महीने के 10-12 तारीक के बाद दुकान खोलता है बिस दिनों में तीन दिन छुट्टी व 1व 2 दिन सर्वर डाउन होने के नाम से बंद रहता है इस तरह महीने में केवल 15 दिन ही राशन मिलता है।ऊपर से बलौदा ब्लाक का सबसे बड़ी गांव जहाँ राशन कार्ड की संख्या 28-29 सौ है।जिसको 15 दिनों में दे पाना कठिन काम है।उपभोकताओ का कहना है कि आधी रात को उठकर राशन कार्ड को जमा करना पड़ता है उसके बाद भी राशन मिलने में 2-3 दिन लग जाते है।इसके बावजूद दर्जनों हितग्राही अपना राशन पाने में असमर्थ होते।
राशन दुकान को दो भाग करने की पुरानी माँग।।
गांव की आधी आबादी वार्ड 1,2,3,4,5 रेल उस पर निवास करती है।व फाटक पर 24 घंटो रेलगाडी खड़ी रहती है मजबरी में लोग गाड़ी अंदर से निकलकर राशन लें या रहे है जिसके चलते की दुर्घटना भी घटित हो चुकी है। ईन समस्याओं को देखते हुवे ग्रामवासियों द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकान को दो भागों में करने मांग बहुत पहले से किया जा रहा है।
वर्जन
“संजय रत्नाकर सरपंच कोसमन्दा-हितग्राहियों को बड़ी समस्या है इसके लिये जिला कलेक्टर को भी आवेदन दिया गया है।”





